जिएं तो जिएं ऐसे

रफ्तार के साथ तालमेल बिठाती जिंदगी में चाहिए ऐसे जीना जो बनाए आपको सबकी आंखों का नूर

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R.K. Jugnoo, पहले खुद अपना ज्ञान बनाओ | मैकाले और मौलाना आज़ाद की गढ़ी हुई कहानियां कोई ऐतिहासिक तथ्य नहीं हैं , ये उन्होंने हिन्दू समाज और भारत की संस्कृति को बर्बाद करने के लिए लिखीं, कोई शोध या तर्क उनसे सहमत नहीं हुआ, बल्कि डिग्री में नम्बर लेने के लिए उनकी हाँ में हाँ मिलनी पड़ती थी | यूनानी इतहास में कहीं भी स का उच्चारण करने में किसी को कठिनाई नहीं होती थी, सैकोरस, सोक्रेट्स, सेक्स्तास, सिमोनिस आदि कई राजा और दार्शनिक यूनान के थे | एक अलग सेलेयूसस राजवंश ने सदियों तक वहां राज किया, यह संभव नहीं कि उनको भारत में ही "स" का उच्चारण करने में कठिनाई हो गयी थी | आर्यों द्वारा कुछ भी बाद में करने की कोई तार्किक घटना नहीं है, आर्य का अर्थ है श्रेष्ठ | हम ईसाई मिशनरियों ने पहली बार आर्य आक्रमण की कहानी बनाई थी, हिन्दुओं को हिन्दुओं से लड़वाने के लिए इसी को प्रोमोट किया गया | क्षेत्रवाद, जातिवाद बेकार अवश्य हैं, लेकिन हम धर्मवाद को नहीं छोड़ेंगे, अधर्मवाद झूठों को ही मुबारक

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अगर आप नहीं जानते तो जान लीजिये की सिन्धु को यूनानी भाषा में हिन्दू कहा जाता है. जब यूनानी भारत आये थे तो वो “स” का उत्चारण “ह” करने की वजह से सिन्धु को हिन्दू कहते थे. इसी तरह से हिन्दू शब्द का उद्भव हुआ. सिन्धु सभ्यता ही हिन्दू सभ्यता है. इसके प्रमाण स्वरुप मैं एक ऐतिहासिक तथ्य सामने रखता हूँ, सिन्धु सभ्यता में सिर्फ एक देवी और एक देवता ही पूजे जाते थे. देवी को “मातृदेवी” एवं देवता को “पशुपतिनाथ” कहा जाता था. जाहिर है यही मातृदेवी बाद में आर्यों के द्वारा “आदिशक्ति” के रूप में स्थापित की गयी और “पशुपतिनाथ” को “शिव” कहा गया. एक बात और, हिन्दू कोई धर्म नहीं—वरन एक सभ्यता का नाम है. अगर विश्वास नहीं आता तो पढ़िए.. शोध कीजिये.. समझ जायेंगे. थोथे तर्क वितर्क करने से बेहतर है कुछ ज्ञानपरक चीजें अपनी जीवन में शामिल कीजिये. क्षेत्रवाद, जातिवाद एवं धर्मवाद सब बेकार की बातें हैं. सभ्य बनिए और सभ्यता की रक्षा कीजिये. जय हिन्द

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दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर कहती हैं कि वे इसे काफी नकारात्मक चलन के रुप में देखती हैं. उनका कहना है कि जिस तरह से समाज बदल रहा है, उसमें यौन संबंध बनना कोई बड़ी बात नहीं है, अगर पुरुषों को इससे कोई परेशानी नहीं है तो महिलाओं को इसे छिपाने की ज़रूरत क्यों है. वे कहती हैं, ''कोई भी वैज्ञानिक प्रगति महिलाओं की भलाई के लिए होनी चाहिए न कि उनके शोषण के लिए. लेकिन देखा यह जा रहा है कि विज्ञान का इस्तेमाल उनके शोषण के लिए ज्यादा हो रहा है चाहे वो गर्भपात हो या वजाइना-टाइटनिंग यानी योनि का ढीलापन ख़त्म करना हो." अपना कौमार्य वापस पाने वाली लड़की की इस बारे में कुछ अलग राय है. वे कहती हैं, ''दरअसल कई चीजें कहने में अच्छी लगती हैं लेकिन हकीकत बहुत अलग है. मुझे नहीं लगता कि अगर मैं अपने पति को इस बारे में बताऊंगी तो वो मुझे अपनाएगा.'' बहरहाल व्यावहारिक चिंता के आगे सिद्धांत कमज़ोर पड़ रहा है

के द्वारा: अजय यादव अजय यादव

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मान्यवर इतनी अच्छी और गहन जानकारी के लिए आभार! यह बात सही है पर कितना और कैसे करे यह सब?फिर आप ही अपने को लुटवाने के लिये ही प्रस्तुत कर रही हैं तो क्यों नहीं कोई लूटेगा आपको?आप सुंदर हैं ,भगवान् ने आपको बहूत सुंदर बना कर भेजा है फिर क्यों आप अपनी ही सेहत से खिलवाड़ कर रही हैं?.सच मानीये आप अपने से ही जो होसके शुरंगार कर लें, अछे से अछे कपडे पहन लें,और समय व पैसा बर्बाद न करें ! याद रखें खूबसूरती में अच्छाई नहीं है ,अच्छाई में खूबसूरती है.तो बनिए अच्छी , फिर देखिये आप कितनी न खूबसूरत लगती है, इन पार्लरों में जाकर आप स्किन को खराब मत करवाईये .फिर सुन्दरता की तो कोई सीमा है ही नहीं ,यह एक सापेक्ष टर्म हैi आप कितनी भी सुंदर हो जाईये, आप से भी खूबसूरत कई लगने लगेगीं फिर आपको कैसा लगेगा?

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के द्वारा: deepaksharmakuluvi deepaksharmakuluvi

के द्वारा: sadhna srivastava sadhna srivastava

1. भारत की बेटियों की गर्भ में रक्षा करने की तुम्हारे अभियान की तारीफ से पहले मुझे बस इतना जानना है की अगर तुम को सच में बेटियों से इतना प्यार है और उनकी इतनी चिंता है तो अपने अब तक के जीवन में किसी बाप की बेटी यानि की अपनी पहली पत्नी को तुम ने तलाक दे कर बेसहारा क्यों बना दिया ???? 2. क्या लोग बेटियां सिर्फ इसलिए पैदा करें जिस से तुम जैसे मीठे जहर अपनी लव जिहादियों की सेना ले कर अपनी मलेक्ष कौम की भेड़ बकरी की तरह बढ़ रही आबादी में दिन दूना रात चौगुना बढ़ोत्तरी कर सकें.....????? 3. मिस्टर आमिर खान..फ़िल्मी जिंदगी से बहार निकल कर असली दुनिया में आओ और दुनिया को विश्वाश दिलाओ की कन्या भ्रूण हत्या पर रोक के अपने सराहनीय अभियान के बाद तुम एक अभियान चलाओगे जिस में २० वीं सदी में चाँद पर जा रही इस दुनिया में किसी भी लड़की को हजारो साले पुराने काले बुर्के में ढका नहीं रहना होगा ?? दूसरा काम तुम केरल हाई कोर्ट और केरल डी जी पी द्वारा स्वीकार लव जिहाद और लव जिहादियों के समूल विनाश में सब से आगे खड़े दिखोगे ??? 4. तुम हमें विश्वाश दिलाओ की तुम एक और महाअभियान चलाओगे जिस में तुम्हारे प्रयास से पैदा किसी भी लड़की का शौहर सिर्फ और सिर्फ उसका बन कर रहेगा, न तो वो ४ - ४ निकाह करेगा और ना ही जन्नत की 72 हूरों के सपने देखेगा और शादी की पवित्रता को जीवन भर स्वीकार करेगा..... तुम दुनिया को विश्वाश दिलाओ की हर उस अभियान में साथ दोगे जिस में पैदा हुयी लड़की को सिर्फ प्यार करने के जुर्म में बीच चौराहे पर कोड़े और पत्थर मारने वालो को देश और दुनिया से निकलने की सजा होगी......... तुम कसम खाओ की दुनिया की उस नापाक किताब को अपने हाथ से जलाओगे जिस में"युद्ध में जीती औरतों से तुरंत बलात्कार करने का फरमान है"".... आमिर खान तुम दुनिया को चीख चीख कर हजारों साल पहले पैदा हुए उस वहशी और दरिन्दे का सच बताओगे जिस ने ६० साल की बूढी उम्र में ९ सा की एक मासूम बच्ची का निकाह के नाम पर बलात्कार किया था .... और सब से पहले जा कर किसी बाप द्वारा पैदा की गयी उस बेटी से बीच चौराहे पर घुटने के बल बैठ कर सार्वजानिक माफ़ी मांग कर वापस अपने पास लाओगे जिस को तुम ने किसी और के चक्कर में पड़ कर तलाक दे कर जिंदगी भर के लिए बेसहारा कर दिया है.......... मिस्टर आमिर खान... जिस भी दिन तुम में इन सब सच्ची शर्तों को या तो झूठा साबित करने या सच्ची होने पर इनको पूरा करने का दम हो जायेगा उस दिन हम जैसे हजारों भगवा प्रेमी आप को अपने दिल, दिमाग, और आत्मा में वो जगह दे देंगे जो हम ने अपने पूज्य पूर्वजों को भी नहीं दिया होगा.और हम मांग करेगे की आमिर खान को बेटियों के देवता का दर्ज़ा दिया जाय......वरना तब तक सेकुलर नाम के मतिभ्रम लोगों से काम चलाते हुए काले बुर्के से अपना भी मुह काला कर लो.... क्यों की हम हिन्दू पहले से ही"यत्र नार्यत्र पूज्यते रमन्ते तत्र देवता"को रटते हुए नारी में देवी का दर्शन करते हैं, बिना तुम्हारी सलाह के.... और सब से जरुरी बात ----- ***** हम हिन्दू बेटियां पैदा करते हैं, उन्हें पालने के लिए***** ना की मलेक्षों की तरह ****बेटियां पालते हैं , उनसे पैदा करने के लिए****..... 'राष्ट्र सर्वप्रथम सर्वोपरि' वन्दे मातरम्... जय हिंद... जय भारत... जय हिन्दू...

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के द्वारा: Muneesh Parichit Muneesh Parichit

मैं इस बात से बिलकुल सहमत नहीं की हर झगडे की शुरुआत केवल पत्नियाँ हिन् करती हैं , यह सरासर गलत बयानी कही जाएगी . हाँ जरुर ऐसा होना चाहिए की झगडे की शुरुआत भले किसीने की हो उसको कैसे जल्द समाप्त किया जाये इसके बारे में दोनों को प्रयास करना चाहिए और अक्सर देखा गया है ये झगडे केवल अहम् की लडाई होते हैं जब एक दुसरे का अहम् टकराता है तभी छोटी से छोटी बात पर पति पत्नी में झगडे होने लगते हैं और दोनों ही एक दुसरे की अछि बैटन को भूलकर केवल बुरी बैटन पर ज्यादा तवज्जो देने लगते हैं और झाग्देव बढ़ते जाते हैं अतः पति पत्नी का सम्बन्ध जो की एक समझौते के रूप में देखा जाना चाहिए उसे झगडे के रूप में ज्यादा जाना जाने लगा है जो एक दुखद बात है अतः इन संबंधो को मधुर कैसे बनाया जाये इस पर विचार करना ज्यादा जरुरी है मेरे विचार से , धन्यवाद एक अछे विषय के चयन के लिए .

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के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

महिलाओं को पैसा ज्यादा पसंद होता है प्यार से भी, लेकिन उन्हें पैसे के साथ प्यार कि भी दरकार होती है. जब आदमी पैसे के पीछे भागने लगता है उसकी मांगो को पूरा करने के लिए और उसके लिए वक़्त नहीं रहता तो वो कहती है आप पहले जैसे नहीं रहे, बदल गए.. और अगर सिर्फ प्यार ही प्यार करे तो वो ताना देती है कि देखो पडोसी ने नयी कार, नया हार ले लिया तुम भी ज्यादा कमाओ चाहे घूस ही खाओ पर उस से ज्यादा कमाओ.. अब बीच में फंसा हुआ मर्द करे तो करे क्या? या तो प्यार ले लो या हीरों का हार ले लो.. औरतों को शोपिंग का बहुत शौक होता है और ये सब सिर्फ पैसे से ही हो सकता है, अच्छा खानपान, मेकअप आदि में वो बाकी औरतों से बेहतर साबित होना चाहती हैं और हर जगह अपनी तारीफ सुनना चाहती हैं वो भी बोल कर, दिल में अगर प्यार हो और उसकी तारीफ किसी और से की जाये उसके सामने न की जाये तो उन्हें गुस्सा आता है.. ये आज की महिलाओं का रंग रूप और उनकी अदा है.. और इसमें अमीरजादे चांदी काटते हैं क्यूँ कि उनके पास बाप की कमाई गयी अथाह दौलत होती है और ढेर सारा वक़्त जिसे वो नयी-२ पैसे के पीछे भाग रही लड़कियों से टाइम पास करने में बिताते हैं. बाद में उनके नयी लड़की मिलने पर छोड़ देने पर ऐसी लड़कियां सरे मर्द जाती को दोषी मान कर यही कहती हैं-- "सारे मर्द एक से होते हैं.."

के द्वारा: gopalkdas gopalkdas

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महिला के बारे में बहुत ही गलत धरना है की वह अमीर पुरुष या धन के लिए भागती है जबकि सत्यता कुछ और ही है मुझे नही मालूम की लैला मजनू में कौन ज्यादा अमीर था ???????? क्या हमें नही मालूम कि हीर और राँझा में अमीर कौन था ????????? क्या हमें नही मालूम कि मिर्जा और साहिबा में अमीर कौन था ????????? क्या राधा का प्रेम क्या अम्मेरे कृष्ण से यह जोड़ कर देखा जा सकता है ???????? क्या अनुसूया का विवाह एक कोढ़ी से प्रेम का उदहारण है या फिट पैसे से प्रेम का ????????/ हा यह सच है कि पर्थिवी पर पाए जाने वाले समस्त प्राणियों में मादा यह हमेशा देखती है कि कौन नर ज्यादा ताकतवर है और उसे ही अपने साथ संसर्ग करने का मौका देती है ????? चाहे नागिन हो या शेर या हाथी या भालू या बर्र या चीटी सभी में मादा के साथ संसर्ग करने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है , जो जीत जाता है वही मादा के साथ संसर्ग करता है पर मनुष्य के सन्दर्भ में बिलकुल अलग हो गया क्योकि संस्कृति बनाने के बाद मादा का चुनाव काफी समय तक उल्टा हो गया पुरुष लड़ाई लड़ कर जिस महिला पर चाहता कब्ज़ा कर लेता और महिला भी उसी पुरुष कि रानी या दासी होकर रह जाती पर धीरे धीरे यह सब बदल गया महिला के लिए लड़ाई नही होती पर महिला का मूल स्वरुप आज भी वही है वह ज्यादातर इस बात का निर्धारण कर के ही किसी के पास जाना चाहती है कि वह ताकत वर है और आज के दौर में ऐसा सबसे ज्यादा ताकतर उपाए है , यही कारन है कि किसी महिला को जब दो या तीन पुरुषो के बीच चुनाव करना होता है तो ताकत के प्रतीक धन को वह आधार मान कर चुनाव करती है और उसे हम समझ न पाने के कारन इतने हलके शब्दों में कह देते है कि महिला अमीरे पुरुष को ही अपना दिल देती है जबकि औरत समस्त प्राणियों में पाई जाने वाली मदो की तरह आज भी उस पुरुष का वरण करती है जो सबसे ताकतर हो और धन एक ताकत का विशिष्ट आधार है जिसे संस्कृति में अपने हिसाब से ताकत न कह कर पैसा खा जा रहा है जो सुधार चाहता है | डॉ आलोक चान्त्टिया , अखिल भारतीय अधिकार संगठन

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के द्वारा: test4hemen test4hemen

आप अपना व्यक्तिगत मत रख सकते हैं, और उसका आपको पूरा हक़ है. उसी तरह दूसरों को भी अपना भिन्न मत रखने का अधिकार है. अब क्या अश्लील है और क्या फूहड़, ये फैसला आप अपने लिए ही कर सकते हैं, पूरे भारतवर्ष के लिए नहीं. मान लीजिये, मैं ही एक ऐसा स्कूल खोलूं. किसी को परेशान न करूं, न ही कोई जोर जबरदस्ती. और यदि ऐसे में भारत की करोड़ों की जनता में से कुछ लोग ऐसे स्कूल में आना चाहें, तो आप क्या करेंगे? क्या उनका स्वेच्छा से अपना जीवन अपने हिसाब से जीने का हक़ छीन लेंगे? हिन्दू-सेना, मुस्लिम-सेना इत्यादि को लेकर ऐसे स्कूल में आग लगा देंगे और शिक्षकों और छात्रों के सर को फोड़ देंगे? शायद ऐसा ही करेंगे आप. सिर्फ उन्नीस बीस का फर्क है आपमें और तालिबान में. आपने रेखा खींची एक जगह, और तालिबान ने थोडा पहले. अगर आपके लिए ऐसी किसी शिक्षा का औचित्य नहीं है, तो ऐसे स्कूल में कभी मत जाईयेगा. अच्छाई बुराई का फैसला आप अपने लिए कर सकते हैं, किसी और के लिए नहीं. मेरे लिए क्या फूहड़ है क्या नहीं, कृपा करके इसका निर्णय मुझ पर ही छोड़ दें. उसी भगवान् ने मुझे बनाया है, जिसने आपको बनाया है. उतनी ही बुद्धि मुझे भी दी है, जितनी आपको. आपकी तरह की सोच के कारण ही आज देश में सोच की आजादी भी नहीं रही है. क्योंकि आपके जैसे महान लोग बैठे हैं जिन्हें पता है क्या सही है क्या गलत. और किसको क्या सोचना चाहिए और क्या करना चाहिए.

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अरे छोड़ो सर ये नैतिकता की बड़ी बड़ी बातें. सबसे अनैतिक लोग भारत में ही बसते हैं. कोई आंटी तक बस में सफ़र नहीं कर सकती, कोई लड़की की बात तो छोड़ ही दो. बच्चों तक को नहीं बक्शते भारत के सम्माननीय पुरुष. इससे तो विदेशी अश्लीलता अच्छी है की कम से कम लोग सर उठा कर तो जी सकते हैं. और क्या अभद्र है और क्या अश्लील, ये निर्णय लोगों को स्वयं लेने दो - ठेकेदार न बनो दूसरों के लिए नैतिकता की परिभाषा समझाने के लिए. भगवान् करे ऐसा स्कूल भारत में भी खुले. किसका मन हो जाये, और किसका न हो, न जाये. लोग अपने आप फैसला कर सकते हैं बिना आपकी मदद के. आप उन लोगों में से हैं जो बिना पढ़े किताब जलाते हैं, और बिना देखे सिनेमा हॉल. पनपते हुए भारतीय तालिबान.

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भारत मैं पुरुषों व स्त्रियों का व्यवहार इंग्लॅण्ड से विभिन्न है . इस लिए इस तरह के लेख भ्रामक व हानिकारक हैं . प्रकृति ने जीव रक्षा के लिए पुरुषों मैं स्त्रियों के प्रति आकर्षण पैदा किया है. यह भ्रम है की स्त्री अधिक सुन्दर है. हर जीव मैं जाहे शेर हो , बैल हो , मुर्गा हो पुरुष ही ज्यादा सुन्दर होता है. स्त्री सिर्फ पुरुष को सुन्दर लगती है जैसे गाय सिफ बैल को सुंदर लगती है . इस प्राकृतिक आकर्षण को विवेक व संस्कारों से संतुलित किया जाता है . विवेक पुरुष के व्यवहार को संतुलित कर सकता है पर उसकी स्त्री के प्रति काम भावनाएं दबी रहती हैं . विवाह से कुछ अंतर नहीं पड़ता . वह सतुलित सामाजिक जीवाण बिताता रहता है पर सुंदर हेरोइने को फिल्म मैं देखता रहता है. अब बदले युग मैं इन्टरनेट पर पोर्न देख लेता है . यह शायद उसके स्वस्थ्य के लिए अच्छा भी होता है. बेकार बात का बतंगड बनाने मैं कुछ नहीं है. पर सौ पिक्चर देख कर और सौ इन्टरनेट पर ' फेक हेरोइने की नग्न तस्वीरें देख कर भी वह जलेबी भी अकेला नहीं खा पाता . परिवार के प्रति वह स्त्री से कम समर्पित नहीं होता . इस लिए उसके फिल्म की हेरोइने या इन्टरनेट के प्रेम को दुश्चरित कहना बंद करें . शारीरिक सम्बन्ध भारत मैं शादी के बाद विश्व मैं सबसे कम होंगे .

के द्वारा: rajivupadhyay rajivupadhyay

चाहे लड़का हो या लड़की अगर जिसको प्रपोज़ कर दिया तो उसके दिल से मत खेलो क्यों की जब दिल टूटता हैं तो पैर तले जमीन सिरख जाती है / देखो मैं तो बस इतना ही कहुगा की जब किस्मत मैं दुःख लिखा हैं तो उसे कोई नहीं बदल सकता हैं /पर कभी भी किसी पर घमंड नहीं करना चाहिए क्योकि .........सूरत......... जो अपनी सुन्दरता पर घमंड करता हैं तो उसका हाल भी बुरा होता है मालूम नहीं की कब एक्सिडेंट हो जाये और उसका सुन्दर चहरा ख़तम हो जाये / ............रूपया ......... कभी कोई भी अपने धन पर कभी भी घमंड न करे मालूम नहीं की कब कोई बीमार हो जाये और सारा धन उसके ऊपर लग जाये / इन्सान को किसी पर घमंड नहीं करना चाहिए / सब नसीब से मिलता हैं / अपने देखा होगा की जब किसी लड़की की शादी होकर आती हैं और उस घर मैं सब कुछ होता हैं और कुछ दिनों बाद सब कुछ नस्ट हो जाता हैं सब किस्मत का खेल हैं / जय माता दी

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यह बात बिलकुल सही है कि आज की नारी प्यार में धोखा देने में अव्वल है.भले ही इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पुरुष एक से अधिक प्रेम-प्रसंगों को गलत नहीं समझते लेकिन अब तो महिलाएं भी ऐसी ही सोच रखने लगी हैं.महिलाओं को हमेशा से ही भावनाओं से जुड़े रहने वाली बताया गया है लेकिन अब वो धारणा टूट गयी है.वर्षों से पुरुष के हाथों का खिलौना बनी नारी अब पुरुष को ही नचाने में लग गयी है.यह स्थिति देखने में भले ही "जैसे को तैसा" वाली लगे लेकिन इसे अच्छा नहीं कहा जा सकता.आज नारी और पुरुष दोनों को ही आत्म-मंथन कर अपने आचरण में सुधार लाने की आवश्यकता है जिससे हमारा सामाजिक ताना-बाना खंडित होने से बच सके.

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आप मुर्ख व्यक्ति लगते है आप को शायद जानकारी न हो अंतरिक्च से ले कर मेडिकल,इंजीनियरिग ,प्रबंधन,और अब तो एयर-फोरसे ,आर्मी हर छेत्र में महिलाये सबसे आगे है बात चाहे मेहनत की हो विद्युता की आज आइ.ऐ एस. या विश्व विद्यालय की डिग्री में महिलाये ही टॉप कराती नजर आती है पेप्सी की इंदिरा नुई पहले आई.आई.टी.है फिर अहमदाबाद से प्रबंधन की पढाई की इसी तरह आई.सी.आई.बैंक की सी.इ.ओ. मिसजे कोचर यह सभी इसी कॉम्पटीशन से ओने बल पर इतना मह्त्व्पुर्द पद प्या है .जब आप उन्हें धर की चाहरदिवाली में कैद रखियेगा तो इसी तरह की उल-जलूल बाते सोचेगे अगेर महिलाओ को खुल कर अपनी प्रतिभा दिखने का अवसर मिले तो मर्द ओरतो से बहुत पीछे रह जायेगे क्योकि यह एक तथ्य है जहा भी महिलाये कार्यरत है वह भ्रष्टाचार और कामचोरी पर अंकुश लग जाता है इसीलिए अब प्राइवेट सेकटर में महिलाओ को वरीयता मिल रही है विदेशी शोध के स्थान पर जहा रह रहे है आज की महिलाये जिस भी छेत्र में जा रही है अपने कार्यकुसलता का झंडा गद रही है.आज सबसे अधिक शोध महिलाओ द्वारा ही समप्पन किया जा रहा है.

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बहुत अच्छा लेख,बधाई जैसे व्यक्ति खाना खता है ठीक उसी प्रकार सेक्स भी शरीर की आवश्यकता है /पर एक बात अवश्य कहूँगा ,आजकल सुरक्षित सेक्स की वकालत बहुत है इसलिए लोग सम्भोग प्रक्रिया में कंडोम आदि का प्रयोग करते हैं /कुंवारे और शादी शुदा भी कंडोम का बहुत प्रयोग करने लगे हैं यह बहुत अच्छी बात है परन्तु कंडोम का प्रयोग करने के बाद उसको कहीं भी फेंक देते हैं यह बहुत गलत बात है/कई बार सामजिक स्थानों पर या कभी मंदिरों या मस्जिदों या चर्चों के पीछे भी कूड़े दान में कंडोम पड़े मिल जाते हैं / सुबह सुबह लोग टहलने जाते हैं और प्रयोग किया हुआ कंडोम सड़क पर ही फेंक देते हैं,हालांकि यह उपयुक्त कोलम नही इस बात को लिखने का परन्तु सामजिक दृष्टि से लिखना पद रहा है/एक बार एक बहुत ही लोकप्रिय महोदय ने प्रयोग किया हुआ कंडोम,बिना गांठ लगा हुआ ऐसे ही फेंक दिया और वह बाईचांस एक शादी शुदा महिला के पैरों के नीचे आ गया था ,अब अंदाज लगाईये की महिला की क्या स्थति हुई होगी?इसलिए मेरा निवेदन है की जो भी पाठक इस लेख को पढ़े तो इस सन्दर्भ को न भूलें और लोगों को जाग्रत करें./ घरों में लोग इन कंडोम को बाथरूम में भी फेंक देते हैं जिनसे घरों की सीवर नाली भी बंद हो सकती हैं, दिल्ली के एक बहुमंजिला इमारत में एक बार सीवर चोक हो गया था सफाई करने वालों ने वहां से हजारों की संख्या में कंडोम निकाले थे /

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के द्वारा: SATYA SHEEL AGRAWAL SATYA SHEEL AGRAWAL

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mahilaaon dawara aadmi per atyachar lekh kuch acha hai per mere hisab se jaise hum mard aurton per bahut se kaao ko per rock lagtey hain aur kahtey aisa vaisa aurat ko nahi karna chhaiye vaisey aurat hum mardon se chhati hai koi bhi ladki nahin chhati usko chhaney wala dusri kisi ladki se ishque ladey woh nahi chhati ki uska prem kahin raha na batak jaayezroori nahin ki ussney aapse iss liye dosti kari hai ki aap shaadi se pahley uskey saath sex karneki socheyein issi liye woh sex ko talti ai baar asia dekha bhi gaya ki ladkey shaadi se pahele sex intercourse kar leytey hai aur samay aaney per mukar jaatey hain issley agar samajhdar ladki hogi tab woh iss baat ko mukaar hi jayegi bharat jaise desh meie ladki pyar karney ke baad bhi aaj ke samay meie achey burey ka gyan rakhti ya tosex karegi nahin aur kar bhi liya tab woh ussi ladke ke saath shaddi karna chayegi uski zindagi samaj ke taaney sunney ki bajaey sukhi jivan jina chhayegi jis ko aaj bharat jaise desh meie prem vivah ki manyta mil chuki aurat ka mardon per atyachar nahin balki prem ka ek yeh samjohta agar mard issey attyachar samjhey woh ek alag baat ladki kabhi bhi nahi chhati ukse ke premi ke hotey woh bill pay tabhi woh apni mauj masti ke liye premi ki jeb saaf karti hai woh jaaanti hai yeh uskey prem jaal meie phans gaya hai uksi ichha hai tab aapko call kargei ya aapki baat ka jawab degi varna aap kaya karlogey aap ko apne roop jaal meie asia phansa deyti hai ki aap kab uske saath sex karogey woh bbhi aadmiyon ki tarah hogayi jaise aadmi sochta tha aurat paer ki juti hai woh bhi aaajkal ladke ko phansa kar bebquf baana deyti hai videshon ki ladkiyan bhi ab bharat ke har riti rivaz ko jaan gayi aur pyar ke saath premi ke zara se bhi chuk honey per itni badi saza deyti hai jo ek mansik atyachar aurat ka mard ke upper hota hai bharat meie mard pahaley hi dara samhea rahta hai ki kahin kisi ko pata na chal jaye aur aurat/ladki iss baat ko jaankar uska kabhi kabhi durpyog karti ki mard ke uper atyachar hi kahlayega

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के द्वारा: Rameshwar Pooniya Rameshwar Pooniya

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