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अकेली औरतों की आजाद तमन्नाएं

Posted On: 21 Apr, 2013 Others,मेट्रो लाइफ में

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आस्था 40 साल की अविवाहित महिला है, एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है. वह सुबह 6 बजे उठती है, खुद लिये कॉफी बनाती है, सुबह की सैर के लिये जाती है, अपने लिये ब्रेकफास्ट-लंच बनाती है और 9 बजे तक तैयार होकर ऑफिस के लिये निकल जाती है. रात के 9 बजे तक घर आती है, अपने लिये डिनर बनाती हैं, बाकी जरूरी काम करती है और वापस अगली सुबह की जद्दोजहद के लिये सो जाती है. मेघा भी 55 की उम्र पूरी करने के कगार पर है. वह एक जानी-मानी कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत है. पैसों की कोई दिक्कत नहीं, मासिक वेतनमान लाख में है पर अकेली रहती है, अब तक अविवाहित है. मेघा को बच्चे बहुत पसंद है इसलिये उन्होंने 5 साल की रूही और 4 साल के अयान को अनाथालय से गोद लिया है. घर के कामों के लिये नौकर है, बच्चों की देखभाल वह खुद करना पसंद करती हैं और अकसर उनके मम्मी-पापा भी भाई के पास से उसके पास रहने के लिये आ जाते है. 9 से 7 की जॉब के बाद जो समय मिलता है वह बच्चों और मम्मी-पापा के साथ बिताती है. कुछ ऐसी ही कहानी नीलिमा की भी है. पेशे से कहानीकार नीलिमा मध्यमवर्गीय परिवार और एक छोटे से शहर से ताल्लुक रखती है. वो एक ऐसा जीवनसाथी चाहती थी जो उसे हर प्रकार से समझे और सहयोग दे. नीलिमा की ये बातें मां-बाप की समझ से बाहर थीं और वे उसकी शादी उच्च-मध्यमवर्गीय परिवार के उच्च पद पर कार्यरत एक ऐसे लड़के से करवाना चाहते थे जिसकी सोच में लडकियां केवल पति की सेवा और घर संभालने के लिये होती हैं. अतः ताउम्र कुंवारा रहने का संकल्प लेकर वह बड़े महानगर में आकर बस गयी जहां लोग शादी न करने पर उससे दस सवाल नहीं करते हैं.


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ये कुछ ऐसी महिलायें हैं जिनकी शादी की उम्र पार कर चुकी है पर अब तक अविवाहित हैं. कुछ हालात से समझौता करना नहीं चाहती थीं तो कुछ का स्व-निर्णय था ताउम्र कुंवारा रहना. ये ऐसे ही खुश हैं. इसी ट्रेंड को देखते हुए हमने यहां अविवाहित महिलाओं के कुछ प्रकारों को सूचीबद्ध करने की कोशिश की है:



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1. सपनों के राजकुमार की चाहतः कुछ महिलायें ख्वाबों में जीना पसंद करती हैं. इन्हें दादी-नानी की कहानियां बहुत लुभाती हैं जिसमें राजकुमार सफेद घोड़े पर आकर राजकुमारी को ले जाता है. ये ऐसे किसी प्रिंस की तलाश में होती हैं जो उनकी ऐसी कल्पनाओं से मेल खाता हो और हकीकत में ऐसा कोई न पाकर अब तक उसका इंतजार कर रही होती हैं.

2. पहले प्यार की कसकः ये कुछ ऐसी महिलाएं हैं जो अकसर ये कहती मिल जाएंगी कि उन्हें पुरुषों से नफरत है और वे अकेले ही खुश हैं. पर हकीकत में वे अपने पहले बेवफा प्यार को भुला नहीं पाती हैं. उनका पुरुष मित्र उनके अलावा दुनिया भर की लड़कियों के साथ मौज-मस्ती, पार्टियां करता फिरता है पर कहीं उनके दिल में होता है कि शायद वो उनके पास वापस आ जाए.

3. सोलमेट की तलाशः ऐसी महिलाएं बहुत भावुक होती हैं. अकसर छोटी-छोटी बातें उन्हें विचलित और दुखी कर देती हैं. अतः वे जीवनसाथी के रूप में एक ऐसा साथी चाहती हैं जो उनकी भावनाओं को समझे, उसकी पसंद-नापसंद को अपनी पसंद बना ले और उनके हर शौक को पूरा करे. जब उन्हें कोई ऐसा मिलता नहीं तो निराश होकर अकेले रहना पसंद करती हैं इस इंतजार के साथ कि शायद कोई ऐसा कहीं मिल ही जाए.

4. आजाद खयाल: ये कुछ ऐसी महिलायें हैं जो आज आपको बहुतायत में मिल जाएंगी. इन्हें अपनी आजादी प्यारी होती है. शादी को ये गैर-जरूरी और बंधन समझती हैं. इनका मानना होता है कि दुनिया में शादी के अलावा भी बहुत काम हैं और ये दुनिया के लिए कुछ करने आई हैं, इन बंधनों में बंधने के लिए नहीं.

5. जिम्मेदारी विहीन मातृत्व सुख की तलाश: कुछ स्त्रियां आजाद ख्याल और आधुनिक जीवनशैली की अभ्यस्त होने के बावजूद मातृत्व सुख का अनुभव लेना चाहती हैं. ऐसी औरतें अपनी व्यस्त लाइफ में शादी को तो बोझ मानती हैं किंतु मातृत्व के एहसास के लिए अनाथ बच्चों को या गोद ले लेती हैं या फिर अनाथालयों में जाकर बच्चों को विभिन्न उपहार देकर उनके साथ समय बिताती हैं. ऐसी स्त्रियों में स्नेह का भाव काफी हद तक जिंदा होता है लेकिन जीवन के कुछ कटु अनुभव उन्हें शादी से दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं.



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तो आप ने उपरोक्त सभी श्रेणियों की ऐसी नारियों के बारे में समझा जिन्हें विवाह और इसके बंधन बिलकुल नहीं भाते फिर भी एन-केन-प्रकारेण वह वैवाहिक संबंधों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले सुख की तलाश में भटकना जारी रखती हैं. जहां तक भारत का सवाल है तो यहां अस्सी के दशक के दौरान मेट्रो कल्चर में ऐसा दिखने लगा था. मेट्रो शहरों में आधुनिक जीवनशैली की प्रधानता होने के कारण कई महिलाएं पूरा जीवन बिना विवाह के जीने में विश्वास करने लगीं हालांकि इसके कई दुष्परिणाम भी उनके जीवन में देखने को मिले. ऐसी कई महिलाएं मानसिक रूप से असुरक्षित और एक समय के बाद अकेलेपन के संताप से पीड़ित भी पाई गईं. अपनी असीमित भौतिक उपलब्धियों के बावजूद परंपरागत पारिवारिक संरचना की कमी उन्हें खलने लगी जिस कारण आत्महत्या और अवसाद की घटनाओं में इजाफा हुआ. आजकल यह ट्रेंड द्वितीय श्रेणी के महानगरों में भी दिखाई देने लगा है जिसके फलस्वरूप उपरोक्त पांचो श्रेणियां यहां भी अलग-अलग तरह से यहां भी देखी जा सकती हैं.


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क्या आप भी बैठे-बैठे पैर हिलाते हैं ?

कहीं जी का जंजाल ना बन जाए ब्रेक-अप

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