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दोस्तों को एक दूसरे से दूर करने की सजा भोगेगा फेसबुक

Posted On: 27 May, 2013 मस्ती मालगाड़ी में

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एक आसान से सवाल का जवाब दीजिए, अपने रियल लाइफ दोस्तों से मिले हुए आपको कितना समय बीत गया है? वे दोस्त जो कभी आपके सुख-दुख के साथी हुआ करते थे आपने आखिरी बार उनके साथ कब और कहां मुलाकात की थी, कब उनके साथ गपशप की थी? शायद आपके लिए यह आसान सा सवाल बहुत पेचीदा हो सकता है, क्योंकि अब आप सोशल नेटवर्किंग साइटों पर समय बिताकर, अपनी आभासी दुनिया में इतना व्यस्त हैं कि आपको अपने असल दोस्तों से मेल-जोल रखने का समय कहा हैं.


डायटिंग करने के दुष्परिणाम


लेकिन फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों की दुनिया दूर से भले ही अच्छी लगती हो लेकिन इसके भीतर भी एक ऐसा कड़वा सच छिपा है जिसे पचा पाना कम से कम युवाओं और किशोरों के लिए तो मुमकिन नहीं है.


किशोरों को पसंद है कंप्यूटर पर पॉर्न फिल्में देखना


एक अध्ययन की मानें तो सोशल नेटवर्किंग साइटें किशोरों औरयुवाओं के लिए बस एक बोझ बनकर रह गई हैं इससे ज्यादा इन साइटों की उनके जीवन में कोई अहमीयत नहीं है. प्यू रिसर्च सेंटर ( Pew Research Center) द्वारा संपन्न इस अध्ययन की रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि बच्चों का इनसोशल नेटवर्किंग साइटों के प्रति उत्सुकता अब अपने ढलान पर है. इसकी वजह से इन साइटों के युवा उपयोगकर्ता आज इनमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं, वह इनसे अब बोरियत महसूस करने लगे हैं.



इस अध्ययन में 12 से 17 वर्ष तक के लगभग 800 बच्चों को शामिल किया गया और हफिंगटन पोस्ट में प्रकाशित इस अध्ययन की रिपोर्ट में बच्चों “ऑनलाइन हैबिट्स” की जानकारी दी गई. जिसके अनुसार फेसबुक अब बच्चों के लिए सामाजिक बोझ बनकर रह गई है.


पुरुष वाकई ये नहीं कर सकते


अब वह अपने ऑनलाइन दोस्तों से बात करने में दिलचस्पी नहीं लेते बल्कि उनके लिए यह बसएक कर्तव्य पूर्ति की तरह है. लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा है कि यह सब होने के बाद भी युवा अपने फेसबुक अकाउंट ना तो डिएक्टिवेट कर रहे हैं और ना ही फेसबुक पर आने से खुद को रोक पाते हैं लेकिन अब उनके व्यवहार और फेसबुक से जुड़ी प्राथमिकताओं में अंतर आने लगा है वह इसे मात्र अब एक औपचारिकता की ही तरह प्रयोग करते हैं. यही वजह है कि इतना सब होने के बाद भी आज की तारीख में लगभग 95 प्रतिशत युवाओं का फेसबुक अकाउंट है. पर हकीकत यही है कि उनके लिए यह सब अब वो महत्व नहीं रखता जो कभी रखा करता था क्योंकि अब फेसबुक की जगह वह इंस्टाग्राम और ट्विटर परसमय बिताना पसंद करते हैं.


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यह सब बिल्कुल वैसा ही है जैसा एक जमाने में फेसबुक ने ऑर्कुट के साथ किया था. सभी को यह बहुत अच्छी तरह ज्ञात होगा जब फेसबुक के आते ही ऑर्कुट का पत्ता कट गया था. हालात इतने बिगड़ गए थे कि यूजर्स अपने ऑर्कुट अकाउंटतक का पासवर्ड भूलने लगे थे.



इससे साफ होता है कि यूजर्स चाहे भारतीय हो या फिर चाहे अन्य किसी भी देश का महाद्वीप के हो, बहुत जल्दी किसी चीज से बोर हो जाते हैं. यह सब वैसा ही है जैसे “जैसे को तैसा” या  “जैसी करनी वैसी भरनी”

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Tags: facebook, facebook vs orkut, orkut, social networking sites, social networking sites and problems, virtual friends, फेसबुक, ऑर्कुट, सोशल नेटवर्किंग साइट




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Chuckles के द्वारा
May 21, 2016

Fidnnig this post has solved my problem


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