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क्यों इतनी बदनाम है ‘कामसूत्र’

Posted On: 1 Jun, 2013 Others,मेट्रो लाइफ में

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भारतीय समाज में सेक्स एक ऐसा शब्द रहा है, जिसे सामाजिक तौर पर इस कदर निषेध समझा गया है कि अगर इसे सार्वजनिक स्थल पर कोई बोलता भी सुनाई देता है तो लोग उसे पलट-पलट कर देखते हैं. आज भले ही हम खुद को कितना ही आधुनिक क्यों ना कह लें लेकिन माना यही जाता रहा है कि हम कभी अपनी मानसिकता में बदलाव ला ही नहीं सकते. लेकिन शायद सच इससे थोड़ा अलग है.




हैरानी की बात तो यह है कि जिस भारत में शारीरिक संबंधों को हमेशा पर्दे के पीछे की चीज माना जाता है उसी भारत के ही एक महान ऋषि वात्स्यायन ने सेक्स पर आधारित कामसूत्र किताब को लिखित रूप प्रदान किया था. इस किताब में ना सिर्फ विभिन्न शारीरिक क्रियाओं का वर्णन है बल्कि आज एड्स जैसी बीमारी से आमजन को बचाने के लिए नए-नए उपचार और बचावों से परिचित करवाया जा रहा है. सदियों पहले वात्स्यायन की इस किताब में उन सभी तरीकों का वर्णन है और वह सभी तरीके पूरी तरह तार्किक भी हैं.


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एक दौर था जब कामसूत्र जैसा शब्द या तो अश्लील फिल्मों का विषय हुआ करता था या फिर दंपत्ति के बीच आपसी चर्चा का एक मसला. यह शब्द अपने आप में इतना अश्लील साबित होने लग गया था या कहें आज भी है कि खुले तौर पर इसका नाम ही शर्मिंदगी का एहसास बन जाता है.




लेकिन अब परिस्थितियां थोड़ी बदलने लगी है क्योंकि सेक्स का पर्याय माने जाने वाली यह किताब अब बंद अल्मारी में ही नहीं बल्कि घर की मेज पर भी पड़ी मिल सकती है. सेक्स पर आधारित इस ग्रंथ का अंग्रेजी अनुवाद करने वाले पूर्व राजनयिक एएनडी हकसर का कहना है कि सेक्स का ग्रंथ कही जाने वाली यह किताब जिस तरह से आज प्रचलित हो रही है और जिस खुलेपन के साथ इसे पढ़ा जा रहा है ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया.



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कई संस्कृत क्लासिकल किताबों का अनुवाद कर चुके एएनडी हकसर का कहना है कि यूं तो बाजार में ‘कामसूत्र’ नाम से काफी किताबें मौजूद हैं लेकिन जिन किताबों में मूल संस्कृत आलेख को पेश किया गया है उनकी संख्या बहुत कम है.




एएनडी हकसर की मानें तो उन्होंने वात्स्यायन की मूल पुस्तक को पढ़ा और पाया कि वह अनेक पुस्तकों और अध्यायों को मिलाकर लिखी गई किताब है और सेक्स संबंधों पर आधारित होने की वजह से इसने लोकप्रियता से ज्यादा बदनामी हासिल की है. लेकिन हकसर के अनुसार इस किताब में सिर्फ सेक्स ही नहीं बल्कि विवाहित जीवन को सुखपूर्वक कैसे बिताया जाए, इसके बारे में भी बहुत कुछ लिखा है. एक स्वस्थ सेक्स लाइफ के लिए यह किताब किसी मार्गदर्शन से कम नहीं है.


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जानकारों की मानें तो कामसूत्र को 200 से 300 ईसा पूर्व लिखा गया था. हकसर के अनुसार भी यह रचना 1700-1800 साल पुरानी है. हकसर के अनुसार रिचर्ड बर्टन ने 19वीं सदी में इसका अनुवाद किया था.


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367 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Genevieve के द्वारा
May 21, 2016

Great common sense here. Wish I’d thoghut of that.

TINA के द्वारा
June 1, 2013

WE SHOULD THINK BEYOND THE LIMITS

rajiv के द्वारा
June 1, 2013

कोई कितना ही कह ले लेकिन यह कभी भारतीय समाज का हिस्सा नहीं बन सकती


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