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ब्रेस्ट कैंसर के निशाने पर हैं कामकाजी औरतें !!

Posted On: 24 Jun, 2013 मेट्रो लाइफ में

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महिला सशक्तिकरण के इस दौर में आज लगभग हर महिला अपने पति, भाई या फिर पिता की ही तरह कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है. महिलाएं घर और बाहर की जिम्मेदारी भली प्रकार से ना सिर्फ संभाल रही हैं बल्कि खुद को हर क्षेत्र में पुरुषों के मुकाबले अव्वल भी साबित करती जा रही हैं. महिलाओं की इस दिनोंदिन होती प्रगति के सुनहरे पहलुओं के स्थान पर एक बेहद दुखद सत्य यह भी है कि इससे वह मानसिक तनाव से तो ग्रस्त हो ही रही हैं साथ ही उनकी सेहत भी नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रही है.



महिलाएं भावनाओं को ज्यादा महत्व देती हैं इसीलिए अगर किसी वजह से वह काम के आगे अपने परिवार पर ध्यान ना दे पाएं तो वह तनावग्रस्त हो जाती हैं और साथ ही अगर कार्यस्थल पर वह अच्छा प्रदर्शन ना कर पाएं तो अपनी आलोचनाओं की वजह से भी वह परेशान हो जाती हैं.


14,000 कदमों के पीछे का राज !!


हाल ही में हुए एक अध्ययन की मानें तो महिलाओं के लिए कामकाजी होना ही उनकी सेहत को खराब करता है और महिलाओं में पाई जाने वाली मुख्य बीमारी स्तन कैंसर भी उन्हीं महिलाओं को अपनी चपेट में ले रहा है जो वर्किंग हैं.



द इंडिपेंडेट में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार इस अध्ययन की मुख्य शोधकर्ता डॉ. तात्याना पुद्रोवोस्का का कहना है कि कामकाजी महिलाओं के ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आने की संभावना अन्य महिलाओं की अपेक्षा 70 प्रतिशत ज्यादा हो जाती है. इस अध्ययन में 4 हजार की संख्या में उन महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर नजर रखी गई जिनकी उम्र उस समय 30 वर्ष थी और पाया गया कि जो महिलाएं घर के साथ-साथ कार्यस्थल की जिम्मेदारी भी संभालती हैं वह ज्यादा तनावग्रस्त तो रहती ही हैं और आगे चलकर उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना भी बढ़ जाती है.


पति जब शक करने लगे तो….


उपरोक्त अध्ययन के अनुसार यह स्पष्ट है कि महिलाओं का दो-दो जिम्मेदारियां संभालना उन्हें शारीरिक और मानसिक तौर से नुकसान पहुंचाता है लेकिन अब जब घर बैठना और सिर्फ अपने परिवार के लिए एक गृहणी के ही तौर पर काम करना किसी को पसंद नहीं है तो जाहिर है महिलाओं के लिए यह एक प्राथमिकता ही है कि वे वर्किंग हों. ऐसे में ना महिलाएं परिवार की देखभाल करना बंद कर सकती हैं और ना ही अपना काम छोड़ना चाहती हैं. ऐसे में अगर उन्हें अपनी सेहत का ख्याल रखना है तो उनके पास व्यायाम, वॉकिंग और योगा के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता जिसके तहत वह खुद को शारीरिक रूप से स्वस्थ रख सकें. जबकि इस अध्ययन को भारतीय महिलाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए इसीलिए यह उनके लिए भी समान रूप से महत्वपूर्ण है.


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Prudence के द्वारा
May 21, 2016

Your thnkiing matches mine – great minds think alike!

Spud के द्वारा
May 21, 2016

You write so hoenltsy about this. Thanks for sharing!


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