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ताकि रोशनी का पर्व फीका ना पड़ जाए

Posted On: 2 Nov, 2013 मेट्रो लाइफ में

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diwaliरंग-बिरंगी रोशनियों के बीच खुशहाली की सौगात लेकर आए दीपावली के त्यौहार की रौनक अपने चरम पर पहुंच चुकी है. घरों, बाजारों और दफ्तरों में दीपावली की धूम आसानी से देखी जा सकती है और साथ ही तोहफों के लेन-देन का सिलसिला भी अब शुरु हो चुका है. भले ही दीपावली की खुशियों को एक-दूसरे के साथ बांटने का तरीका और रिवाज सभी के अलग-अलग होते हों लेकिन सच यही है कि हिन्दुओं के सबसे बड़े त्यौहार के तौर पर मनाए जाने वाला पर्व दीपावली सभी के लिए बहुत खास महत्व रखता है. कुछ लोगों के लिए दीपावली का त्यौहार रोशनी का पर्व हैं तो कुछ लोग इस दिन को एक-दूसरे के साथ मेलजोल बढ़ाने का जरिया मानते हैं लेकिन ऐसे में हम उन लोगों का जिक्र कैसे छोड़ सकते हैं जिनके लिए दीपावली बम-पटाखों और धूम-धड़ाके का त्यौहार है.


दीपावली से कई दिन पहले ही पटाखे फोड़ने का सिलसिला शुरु हो जाता है. पटाखों से निकलने वाले धुएं से पर्यावरण को तो नुकसान पहुंचता ही है साथ ही सेहत के लिहाज से भी पटाखों से निकलने वाला प्रदूषण बेहद हानिकारक होता है. खैर अगर हम ये कहें कि बिना पटाखों के दीपावली मना लीजिए तो आप मानेंगे नहीं इसीलिए हम आपसे ऐसा कुछ नहीं कहने वाले. हम तो बस आपको कुछ ऐसे टिप्स दे सकते हैं ताकि आपकी दीपावली में किसी भी तरह का व्यवधान ना पड़े.


सबसे पहला ध्यान तो आपको अपने उन शरारती बच्चों का रखना होगा जो आपसे नजर चुरा कर इधर-उधर चले जाते हैं. बच्चे तो पटाखे से होने वाले नुकसान को नहीं समझ पाते हैं इसीलिए आपको उनका ध्यान तो रखना ही होगा.


दीपावली पर पटाखे जलाते हुए अपने कपड़ों का खास ध्यान रखना होगा. नाइलन के कपड़े पहनकर आपको दीपावली का आनंद उठाना रास नहीं आएगा इसीलिए अगर आप आग के साथ दीपावली मनाने जा रहे हैं तो सूती कपड़े पहनें.


अपने बच्चों को ज्यादा तेज आवाज वाले पटाखे भी ना लेकर दें क्योंकि इससे उनकी सुनने की शक्ति कम हो सकती है. पटाखों की तेज आवाज से कान के पर्दे तक फट सकते हैं.


दीपावली मनाने के साथ-साथ आपको अपने पर्यावरण और आस-पड़ोस का भी ध्यान रखना चाहिए. अगर किसी को आपके द्वारा मनाए जाने वाले तरीके से परेशानी हो सकती है इसीलिए अपने साथ-साथ दूसरों की सहूलियत का भी ध्यान रखें.




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