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नासा से भी टैलेंटेड वैज्ञानिक भारत की गलियों में घूम रहे हैं, यकीन नहीं आता तो खुद ही पढ़ लीजिए

Posted On: 25 Apr, 2014 lifestyle में

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हम भारतीयों की अदा बड़ी निराली है. यहाँ बीरबल खिचडी बनाकर नसीहतें देता है और रामदेव नसीहतें देकर लोगों को हंसाया करते हैं. कमाल के फंडे हैं पर हम अंडे नहीं हैं. हम वह कर सकते हैं जो दुनिया में कोई नहीं कर सकता. दिमाग है हमारे पास. इतिहास गवाह है कि दुनिया में शून्य और दशमलव का आविष्कार हमने ही किया है. सिन्धु घाटी की सभ्यता हमारी सिविलाइजेशन है. इतने बड़े बाथरूम उस जमाने में थे कि किसी रॉयल पैलेस में भी क्या ऐसे बाथरूम होंगे. अपनी तारीफें हम खुद क्या करें अब. हम तो वो हैं जो सब्जियों के छिलके निकालकर उसके भी पकौड़े बना लेते हैं. कहाँ किचन चले गए. दिमाग की बातें हो रही थीं और औरतों को तो दिमाग की बातें करते माना नहीं जाता. इसलिए बात करते हैं टेक्नोलॉजी की. दुनिया कहती है कि नासा वैज्ञानिकों का हब है. अरे भारत आइए. हर गली मोहल्ले में इतने वैज्ञानिक नजर आएँगे कि आप विज्ञान भूल जाएंगे. पर यही है कि इसे समझाने के लिए भी दिमाग चाहिए वरना तो आपने सुना ही होगा कि हर जीनियस को दुनिया पागल कहती है. यहाँ कुछ प्रूफ हैं जो हमारे मल्टी-टैलेंट की कहानी चीख-चीखकर कहते हैं लेकिन कोई सुनता नहीं:


Speciality of India


मल्टी टैलेंटेड फोन (जिसमें एक्स्ट्रा दिमाग हमारा होता है): फोन का आविष्कार हुआ था कनेक्टिविटी के पर्पज से. सच है, हम भी मानते हैं पर अगर चीजें उपलब्ध हैं तो उसका पूरा इस्तेमाल क्यों न करें! हम करते हैं. एक मोबाइल फोन खरीदने में इतने खर्च आते हैं इसलिए मिस्ड कॉल देकर पैसे बचाते हैं. मोबाइल की कीमत से ज्यादा ही खर्च निकल आता है. और तो और लाइट जाने पर टॉर्च की बैटरी के खर्च को भी इसे जलाकर बचा लेते हैं, रेडियो चलाकर मनोरंजन भी कर लेते हैं, और तो और हम तो अब स्कैनर का काम भी इसी से चला लेते हैं. आखिर कैमरा फोन में बड़ी कीमत खर्च करने का कुछ तो फायदा हो.


Great India

ये टिप्स बताएंगे कौन है आपका सोलमेट


चम्मच (खाने के अलावे कुछ भी और सोचो): चम्मच तो पूरी दुनिया खाना खाने के काम लाती है. हम इसमें भी थोड़ा एक्स्ट्रा दिमाग लगाते हैं. कुकर की स्क्रू ढीली हो गयी चम्मच और चाकू से ही काम चला लिया करते हैं, पेचकस और किसी और औजार की जरूरत ही नहीं पड़ती.


technology in India


टूथब्रश/टूथपेस्ट (तकनीक हर जगह है बस उसे ढूँढ़ने की जरूरत है): टूथपेस्ट तो हर कोई इस्तेमाल करता है लेकिन टूथपेस्ट को किसी तकनीक से जोड़ा जाए तो क्या बात है. हमारे सुपर साइंटिस्ट घरेलू डॉक्टरों ने दांत साफ करने से अलग इसकी एक्स्ट्रा खूबियों को ढूंढ़ा है. अगर कीड़ा काट ले तो टूथपेस्ट यूज करो भाई दवाइयों के पैसे बचेंगे. और तो और हमारे सुपर साइंटिस्ट बच्चों ने तो इसे भी एक टेस्टी डिश बना दिया और टूथपेस्ट दांतों पर लगाने की बजाए खाने में उपयोग करने लगे.


सिंगल मर्द से ना करें ये बातें


और टूथपेस्ट का हमराही टूथब्रश! इसकी तो बात ही मत पूछिए, मल्टी टैलेंटेड हमारे गली-गली के वैज्ञानिकों ने इसे भी मल्टी-टैलेंटेड बना दिया. दांत साफ कर यह बेचारा जब रिटायर हो जाता है तो बाल डाई करने, किसी कॉर्नर की गन्दगी साफ करने में इस तरह काम आता है कि क्या कोई वैक्यूम क्लीनर सफाई करेगा.


funny innovations in india



Funny Innovations


ये तो अदना से कुछ नमूने हैं. ऐसे कई टैलेंट आपके पास भी होंगे या आप जानते होंगे. तो हमारे इस टैलेंट को सलाम कीजिए और कोई नया टैलेंट इजाद कीजिए. आखिर दुनिया को भी तो पता चले यह वैज्ञानिकों की दुनिया है!

ऐसे मर्दों से दूर ही रहें तो अच्छा है

इस हुस्न के पीछे बहुत से राज छिपे हैं

Web Title : funny innovations in india



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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R.K.Jugnoo के द्वारा
April 27, 2014

Why do you want to Insult Indian reputation by showing and writing all these ? Can’t you do something really creative ? I came to read for Appreciating India, I am ashamed by you people, who write and publish these funny things on the name of talent. By the way this is misuse of science.. Find something where we Indian really apply science and that is one and only in the world.. Find some news and events like that.. Stop sharing Bullshits and stop being crazy.. India is very appreciable.. but You need to realize it first.. Explore her real talent and real beauty.. that will be highly appreciable. Its not a matter of Fun, Its a matter of Pride.. If you can do It do It, otherwise Atleast appreciate those who are doing this.. Jai Hind.

    nandini के द्वारा
    May 24, 2014

    I am totally agree with you sir………..It’s a matter of pride not fun……….all are the things which has been included in this article by saying talent is exactly just ridicules………….

vinod के द्वारा
April 26, 2014

सिंधु घाटी की सभ्यता पहले सिंधीयो की है

    R.K.Jugnoo के द्वारा
    June 17, 2014

    अगर आप नहीं जानते तो जान लीजिये की सिन्धु को यूनानी भाषा में हिन्दू कहा जाता है. जब यूनानी भारत आये थे तो वो “स” का उत्चारण “ह” करने की वजह से सिन्धु को हिन्दू कहते थे. इसी तरह से हिन्दू शब्द का उद्भव हुआ. सिन्धु सभ्यता ही हिन्दू सभ्यता है. इसके प्रमाण स्वरुप मैं एक ऐतिहासिक तथ्य सामने रखता हूँ, सिन्धु सभ्यता में सिर्फ एक देवी और एक देवता ही पूजे जाते थे. देवी को “मातृदेवी” एवं देवता को “पशुपतिनाथ” कहा जाता था. जाहिर है यही मातृदेवी बाद में आर्यों के द्वारा “आदिशक्ति” के रूप में स्थापित की गयी और “पशुपतिनाथ” को “शिव” कहा गया. एक बात और, हिन्दू कोई धर्म नहीं—वरन एक सभ्यता का नाम है. अगर विश्वास नहीं आता तो पढ़िए.. शोध कीजिये.. समझ जायेंगे. थोथे तर्क वितर्क करने से बेहतर है कुछ ज्ञानपरक चीजें अपनी जीवन में शामिल कीजिये. क्षेत्रवाद, जातिवाद एवं धर्मवाद सब बेकार की बातें हैं. सभ्य बनिए और सभ्यता की रक्षा कीजिये. जय हिन्द

    Raj के द्वारा
    August 20, 2014

    R.K. Jugnoo, पहले खुद अपना ज्ञान बनाओ | मैकाले और मौलाना आज़ाद की गढ़ी हुई कहानियां कोई ऐतिहासिक तथ्य नहीं हैं , ये उन्होंने हिन्दू समाज और भारत की संस्कृति को बर्बाद करने के लिए लिखीं, कोई शोध या तर्क उनसे सहमत नहीं हुआ, बल्कि डिग्री में नम्बर लेने के लिए उनकी हाँ में हाँ मिलनी पड़ती थी | यूनानी इतहास में कहीं भी स का उच्चारण करने में किसी को कठिनाई नहीं होती थी, सैकोरस, सोक्रेट्स, सेक्स्तास, सिमोनिस आदि कई राजा और दार्शनिक यूनान के थे | एक अलग सेलेयूसस राजवंश ने सदियों तक वहां राज किया, यह संभव नहीं कि उनको भारत में ही “स” का उच्चारण करने में कठिनाई हो गयी थी | आर्यों द्वारा कुछ भी बाद में करने की कोई तार्किक घटना नहीं है, आर्य का अर्थ है श्रेष्ठ | हम ईसाई मिशनरियों ने पहली बार आर्य आक्रमण की कहानी बनाई थी, हिन्दुओं को हिन्दुओं से लड़वाने के लिए इसी को प्रोमोट किया गया | क्षेत्रवाद, जातिवाद बेकार अवश्य हैं, लेकिन हम धर्मवाद को नहीं छोड़ेंगे, अधर्मवाद झूठों को ही मुबारक

    R.K.Jugnoo के द्वारा
    November 13, 2014

    सतही एवं छद्म अलंकृत शब्दों के प्रयोग से कोई ज्ञानी नहीं हो जाता। विद्या ददाति विनयम तो सुना ही होगा. आपकी भाषा और देख कर ऐसा नहीं लगता की आप मैकाले और मौलाना आज़ाद के मामले से बाहर निकल कर कुछ और सुनने समझने के लिए तैयार हैं. निराशा हुई आपकी भाषा शैली और सतही बातों को पढ़ कर. मुझे माफ़ करें. आपको आपका ज्ञान मुबारक हो.

    R.K.Jugnoo के द्वारा
    November 13, 2014

    सैकोरस, सोक्रेट्स, सेक्स्तास, सिमोनिस ये यूनानी नामों का हिंदी रूपांतरण है. जैसे यूनान में “एलेक्सेंडर” हिंदी “सिकंदर”. खैर, रहने दीजिये। जय हिंद


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