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सिंदूर, कंगन, नाक-कान छिदे हुए...आखिर क्यों करती हैं हिंदू स्त्रियां ये खास किस्म के श्रृंगार?

Posted On: 17 Oct, 2014 lifestyle में

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स्त्रियां चूडियां क्यों पहने, कान क्यों छिदवाएं, नथ क्यों डालें, सिंदूर क्यों लगाएँ अक्सर प्रगतिशील विचारक और नारीवादी ऐसे सवाल उठाते रहे हैं. यहां मशहूर गीतकार गुलजार की यह नज्म गौर करने लायक है…


Sindoor


कितनी गिरहें खोली है मैने,

कितनी गिरहें अब बाकी है

पांव में पायल, हाथों में कंगन,

गले में हसली, कमरबंद,

छल्ले और बिछुए

नाक-कान छिदवाए गए हैं,

और जेवर-जेवर कहते-कहते

रित-रिवाज की रस्सियों से मैं

जकड़ी गई, उफ्फ कितनी तरह मैं पकड़ी गई।


क्या सचमुच औरतों का साजो-श्रृंगार एक बंधन है जिसे षड़यंत्र पूर्वक औरतों पर लाद दिया गया है ताकि उनकी गति अवरूद्ध हो जाए, वे पुरूष वर्चस्व वाले समाज में हमेशा-हमेशा के लिए पुरूषों पर आश्रित रहें या इसमें कहीं स्त्रियों का कल्याण भी छुपा हुआ है? हिंदू रीति-रिवाज की वैज्ञानिक व्याख्या करने वालों की माने तो हिंदू औरतों के हर श्रृंगार प्रसाधन के पीछे बड़े ही ठोस वैज्ञानिक कारण छुपें हैं और अंतत: इसका लाभ औरतों को ही होता है।


सिंदूर लगाने के क्या लाभ हैं?


क्या सिंदूर लगाने का एकमात्र उद्देश्य विवाहित और अविवाहित स्त्रियों में भेद करना है? आखिर क्यों जरूरी है एक विवाहिता के लिए सिंदूर लगाना? और एक कुंवारी लड़की सिंदूर क्यों नहीं लगा सकती?

sindoor dibbi


इसके पीछे तर्क ये है कि सिंदुर लगाने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है और यौन इच्छा जागृत होती है. सिंदूर को बनाने में जिन तत्वों का प्रयोग किया जाता है उसमें हल्दी, चूना और पारा धातु शामिल रहती है. इन तत्वों में औषधीय गुण होता है. क्योंकि सिंदूर लगाने से कामोत्तेजना बढ़ती है इसलिए विधवाओं और कुंवारी स्त्रियों को सिंदूर लगाने की मनाही है. सिंदूर को पीयूषिका ग्रंथी तक लगाने से अधिक लीभ होता है. सिंदूर तनाव और अवसाद भी दूर करता है.


कान क्यों छिदवाए जाते हैं?


भारतीय परंपरा में कान छिदवाने का विशेष महत्व है. भारतीय चिकित्सकों और दार्शनिकों का मानना है कि बचपन में कान छिदवाने से बौद्धिक क्षमता, विचार करने की क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता के विकास में मदद मिलती है. कान छिदवाने से व्यक्ति कम बोलता है जिससे बातुनीपन से बचने वाली उर्जा जीवन उर्जा में तब्दील हो जाती है. अब तो कान छिदवाने के लाभों के कारण पश्चिमी मुल्कों में भी यह परंपरा जोर पकड़ते जा रही है.


चूडियां क्यों पहनती हैं भारतीय औरतें?


मानव के शरीर में कलाई का हिस्सा अधिकांश समय सक्रिय रहता है. कलाई में पहनी जाने वाली चुड़ियां के निरंतर घर्षण से रक्त संचार में वृद्धि होती है. साथ ही चूड़ियों के गोलाकार होने के कारण बाहरी त्वचा से निकलने वाली विद्युत उर्जा दुबारा शरीर की दिशा में निर्देशित हो जाती है. चूड़ी का कोई छोर न होने के कारण उर्जा शरीर से बाहर नही जा पाती.

Bangles


इसमें कोई शक नहीं की हर परंपरा के पीछे कुछ ठोस वैज्ञिनिक कारण गिनाए जा सकते है पर इस बात में भी कोई शक नहीं की यह परंपराएं कभी-कभी स्त्रियों के लिए बेड़ियां बन जाती हैं. वैसे भी आधुनिक जीवनशैली में हर एक रीति-रिवाज का महत्व महज प्रतिकात्मक रह गया है. समय बदलने के साथ इन परंपराओं का हुबहु निबाह करना संभव भी नहीं है. भारतीय स्त्रियों को इस बात की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे आधुनिक जीवनशैली और सदियों पुरानी इन परंपराओं में अपने सुविधानुसार संतुलन बैठा सके.



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465 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ladainian के द्वारा
May 21, 2016

That’s a nicely made answer to a chalnelging question

Abhilasha Pandey के द्वारा
October 18, 2014

जिसने यह पोस्ट किया है सबसे पहले तो उसे चाहिए की सबसे पहले वो इतनी ऊर्जा देने वाली चूड़ीयों को सबसे पहले अपने घर के सारे पुरुषो को पहनाये। आखिर ऊर्जा की जरूरत उनको भी तो है ……… फालतू की परम्पराओं को जबरदस्ती साइंस से जोड़कर एक्सप्लेन करने का बहोत अच्छा तरीका ढूंढा है पोस्ट करने वाले ने। …… यह हमारी संस्कृति है और हम निभाते है वो अलग बात है पर यो जबरदस्ती साइंस थोपना गलत है

    Kaylie के द्वारा
    May 21, 2016

    Whoever wrote this, you know how to make a good artielc.

vivek के द्वारा
October 18, 2014

NICE

akhilesh gupta के द्वारा
October 18, 2014

jab itna benefit ha to, to wife hi kyo gents…………. husbands kyo nahi use karte,…………main koi comment nahi kar raha…………………………… fayde ki baat par kah raha hu……………. wahi ha ki husband use karega to loog laugh karenge”””””””’

    ANOOP MAURYA के द्वारा
    October 18, 2014

    sala pagal ho gaya kya jo dusaro ko hasta h

    Johannah के द्वारा
    May 21, 2016

    Help, I’ve been informed and I can’t become igantnor.

pravin के द्वारा
October 18, 2014

bhai kuch bhi majak karte ho Agar ye vednenik he to orat ke liye hi kiu sab admi ko kuch nahi chahi ke. sab bakvas prampra he.

    Sandy के द्वारा
    May 9, 2015

    Pehle k jmane mein gents k hatho mein bhi kadee hote h


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